रिफ्यूजी एरिया को फ्लैट बताकर बेचने वालों को सोसायटी सदस्यता देने से बॉम्बे हाई कोर्ट का इन्कार

 

बॉम्बे हाई कोर्ट (HC) ने बुधवार को एक अहम फैसले में उन खरीदारों को हाउसिंग सोसायटी की सदस्यता देने से इन्कार कर दिया, जिन्हें ऐसे “फ्लैट” बेचे गए थे जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने डिवीजनल जॉइंट रजिस्ट्रार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भांडुप वेस्ट की एक हाउसिंग सोसायटी में पांच कथित फ्लैट खरीदने वालों को सदस्यता देने को कहा गया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डेवलपर ने जिन दो खरीदारों को फ्लैट बेचने का दावा किया, वे दरअसल इमारत के रिफ्यूजी एरिया (आपातकालीन सुरक्षित क्षेत्र) थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि “रिफ्यूजी एरिया को न तो फ्लैट माना जा सकता है और न ही कच्चा फ्लैट।”

न्यायमूर्ति फिरदौस पूनावाला की एकल पीठ ने कहा कि अगर इन खरीदारों को सदस्यता दी जाती, तो यह महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम, 1960 का सीधा उल्लंघन होता, क्योंकि सोसायटी के सदस्यों की संख्या फ्लैटों की संख्या से अधिक हो जाती। अदालत ने अपने फैसले में कहा, “इस प्रकार के अवैध कार्य को अदालत की मंजूरी देना उचित नहीं होगा।”

भांडुप वेस्ट स्थित ‘धीरज ड्रीम्स’ बिल्डिंग की 16 में से 10 इमारतों का प्रबंधन करने वाली चार हाउसिंग सोसायटियों ने साल 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने 22 जुलाई 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें डिवीजनल जॉइंट रजिस्ट्रार ने हुकमसिंह सेवडशा और चेतनसिंह सेवडशा को सोसायटी का सदस्य बनाने का निर्देश दिया था। सेवडशा परिवार का दावा था कि उन्होंने 30 अप्रैल 2019 को डेवलपर हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इम्प्रूवमेंट इंडिया लिमिटेड से पांच फ्लैट खरीदे थे।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मुख्य अभियंता ने 5 सितंबर 2009 को इन इमारतों को पूर्ण अधिभोग प्रमाणपत्र (OC) जारी किया था। सोसायटियों ने अदालत को बताया कि OC के साथ संलग्न प्लान में कुछ खाली जगहों को फ्लैट दिखाया गया था, जबकि वास्तव में वह रिफ्यूजी एरिया थी। इसी त्रुटि का फायदा उठाकर इन स्थानों की अवैध बिक्री की गई।

सोसायटी की ओर से पेश वकील एस. बी. शेट्टी ने दलील दी कि जॉइंट रजिस्ट्रार ने अवास्तविक (बिना निर्माण वाले) फ्लैटों को वैधता दे दी। वहीं, सेवडशा पक्ष के वकील ने कहा कि जॉइंट रजिस्ट्रार ने यह पाया था कि फ्लैट और रिफ्यूजी एरिया अलग हैं, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने फ्लोर प्लान का हवाला देते हुए साफ कहा कि “प्रतिवादी द्वारा बताए गए फ्लैट वास्तव में रिफ्यूजी एरिया ही हैं।”

बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 31 मई 2017 को हाउसिंग सोसायटियों को ‘डीम्ड कन्वेयंस’ का प्रमाणपत्र जारी होने के बाद डेवलपर के संपत्ति पर अधिकार समाप्त हो गए थे। ऐसे में 2019 में किए गए बिक्री समझौते “अवैध” हैं।

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि BMC इन विवादित जगहों को रिफ्यूजी एरिया मानती रही है और उन पर कभी प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं लगाया।

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